Skip to content
Pujari Ji
Knowledge

अथ अर्गलास्तोत्रम्

अथ अर्गलास्तोत्रम्

22 February 20262 min read

अथ अर्गलास्तोत्रम्

ॐ नमश्वण्डिकायै

मार्कण्डेय उवाच

ॐ जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतापहारिणि .
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते .. १..

जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी .
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते .. २..

मधुकैटभविध्वंसि विधातृवरदे नमः .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. ३..

महिषासुरनिर्नाशि भक्तानां सुखदे नमः .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. ४..

धूम्रनेत्रवधे देवि धर्मकामार्थदायिनि .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. ५..

रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. ६..

निशुम्भशुम्भनिर्नाशि त्रिलोक्यशुभदे नमः .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. ७..

वन्दिताङ्घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. ८..

अचिन्त्यरूपचरिते सर्वशत्रुविनाशिनि .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. ९..

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चापर्णे दुरितापहे .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. १०..

स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. ११..

चण्डिके सततं युद्धे जयन्ति पापनाशिनि .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. १२..

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि देवि परं सुखम् .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. १३..

विधेहि देवि कल्याणं विधेहि विपुलां श्रियम् .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. १४..

विधेहि द्विषतां नाशं विधेहि बलमुच्चकैः .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. १५..

सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेऽम्बिके .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. १६..

विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तञ्च मां कुरु .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. १७..

देवि प्रचण्डदोर्दण्डदैत्यदर्पनिषूदिनि .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. १८..

प्रचण्डदैत्यदर्पघ्ने चण्डिके प्रणताय मे .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. १९..

चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंसुते परमेश्वरि .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. २०..

कृष्णेन संस्तुते देवि शश्वद्भक्त्या सदाम्बिके .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. २१..

हिमाचलसुतानाथसंस्तुते परमेश्वरि .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. २२..

इन्द्राणीपतिसद्भावपूजिते परमेश्वरि .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. २३..

देवि भक्तजनोद्दामदत्तानन्दोदयेऽम्बिके .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. २४..

भार्यां मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम् .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. २५..

तारिणि दुर्गसंसारसागरस्याचलोद्भवे .
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि .. २६..

इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः .
सप्तशतीं समाराध्य वरमाप्नोति दुर्लभम् .. २७..

.. इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे अर्गलास्तोत्रं समाप्तम् ..

Spiritual Connection

Ready to Connect with Divinity?

Join thousands of families who have found peace through our Pandit-led services, personalized Sankalps, and authentic Vedic rituals.

Book Puja Now